श्रीकृष्ण जन्मोत्सव केवल भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का पर्व नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म, अन्याय पर न्याय और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश देने वाला पावन अवसर है।
स्वतंत्र भारत में प्रकाशित अपने लेख में ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री राजीव आचार्य ने श्रीकृष्ण जन्म के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व को विस्तार से बताया है। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन मानव समाज को धर्म, कर्म, सत्य, न्याय और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
श्रीकृष्ण का जन्म ऐसे समय हुआ जब अत्याचार और अधर्म का प्रभाव बढ़ रहा था। उनके जीवन और कर्मों में धर्म की स्थापना, अन्याय के विरोध और मानव कल्याण का संदेश दिखाई देता है। यही कारण है कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव आज भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
राजीव आचार्य के लेख में श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया है कि कठिन परिस्थितियों में भी मनुष्य को सत्य, धर्म और कर्तव्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
श्रीकृष्ण का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है—धर्म के मार्ग पर चलते हुए अपने कर्तव्य का पालन करना और अन्याय के सामने कभी झुकना नहीं।
