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नवरात्रि के चौथे दिन होगी सृष्टि के उद्भव स्वरूप देवी कूष्मांडा की आराधना – राजीव आचार्य | भास्कर डिजिटल

नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, देवी कूष्मांडा को सृष्टि के उद्भव और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री राजीव आचार्य अपने लेख में देवी के दिव्य स्वरूप, पौराणिक कथा और उपासना के धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व पर प्रकाश डालते हैं।

पौराणिक मान्यता है कि जब चारों ओर अंधकार व्याप्त था, तब देवी की मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई। इसी कारण मां कूष्मांडा को आदिशक्ति और सृष्टि की जननी के रूप में पूजा जाता है। उनका अष्टभुजी स्वरूप शक्ति, तेज और कल्याण का प्रतीक माना जाता है।

लेख में मां कूष्मांडा के हाथों में सुशोभित दिव्य आयुधों, मालपुए के भोग, अनाहत चक्र की साधना और सूर्य से जुड़े ज्योतिषीय महत्व का उल्लेख किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी की आराधना से आयु, आरोग्य, यश और आत्मबल की कामना की जाती है।

राजीव आचार्य का यह लेख नवरात्रि की परंपराओं और मां कूष्मांडा के आध्यात्मिक स्वरूप को समझने का अवसर प्रदान करता है।

लेखक: राजीव आचार्य
पहचान: ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री
प्रकाशन: भास्कर डिजिटल