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देवी का स्वरूप परम कल्याणकारी: नवरात्रि के तीसरे दिन शक्तिस्वरूप मां चंद्रघंटा की होगी आराधना – राजीव आचार्य

शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री राजीव आचार्य अपने लेख में मां चंद्रघंटा के दिव्य स्वरूप, पौराणिक कथा और आध्यात्मिक महत्व का वर्णन करते हैं।

मां चंद्रघंटा का मस्तक घंटे के आकार के अर्धचंद्र से सुशोभित है। सिंहवाहिनी और अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित देवी का यह स्वरूप शक्ति, साहस और दुष्टता के विनाश का प्रतीक माना जाता है। उनके स्वरूप में शस्त्रों के साथ कमल, जपमाला और अभय मुद्रा भी दिखाई देती है, जो शक्ति और करुणा के संतुलन का संदेश देती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की आराधना से भक्तों को निर्भयता, आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता की प्रेरणा मिलती है। नवरात्रि के तीसरे दिन उनकी उपासना का विशेष महत्व है। लेख में पीले रंग के वस्त्र, पुष्प और भोग अर्पित करने की परंपरा तथा योग साधना में मणिपुर चक्र के महत्व का भी उल्लेख है।

राजीव आचार्य का यह लेख मां चंद्रघंटा की महिमा और उनके शक्तिस्वरूप से जुड़े धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहलुओं को समझने का अवसर प्रदान करता है।

लेखक: राजीव आचार्य
पहचान: ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री
प्रकाशन: दैनिक भास्कर UP/UK