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नवदुर्गा का द्वितीय रूप मां ब्रह्मचारिणी: तपस्या, संयम और शक्ति का प्रतीक – राजीव आचार्य | दैनिक जागरण

नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। उनका तपस्विनी स्वरूप धैर्य, संयम, दृढ़ संकल्प और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री राजीव आचार्य अपने लेख में मां ब्रह्मचारिणी की पौराणिक कथा, तपस्या और उपासना के महत्व पर प्रकाश डालते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी देवी पार्वती के उस स्वरूप का प्रतीक हैं, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनके दाएं हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल सुशोभित है।

मां ब्रह्मचारिणी की आराधना साधकों को धैर्य, आत्मसंयम, एकाग्रता और लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा देती है। धार्मिक परंपराओं में उनकी पूजा को वैवाहिक मनोकामनाओं से भी जोड़ा जाता है।

राजीव आचार्य का यह लेख मां ब्रह्मचारिणी के आध्यात्मिक स्वरूप, पौराणिक प्रसंगों और नवरात्रि में उनकी उपासना के महत्व को समझने का अवसर प्रदान करता है।

लेखक: राजीव आचार्य
पहचान: ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री
प्रकाशन: दैनिक जागरण