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शबरी की भक्ति से जन-जन के हुए राम – राजीव आचार्य | स्वतंत्र भारत

रामायण में शबरी की भक्ति को निष्काम, निस्वार्थ और पूर्ण समर्पण का सर्वोत्तम उदाहरण माना जाता है। स्वतंत्र भारत में प्रकाशित अपने लेख में ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री राजीव आचार्य बताते हैं कि कैसे शबरी की सरल भक्ति ने भगवान श्रीराम को जन-जन का आराध्य बना दिया।

शबरी का जीवन यह सिखाता है कि ईश्वर को पाने के लिए न तो कुल, न वैभव और न ही विद्वता आवश्यक है—बल्कि सच्चा प्रेम, श्रद्धा और विश्वास ही पर्याप्त है। प्रभु राम का शबरी के आश्रम में आना और उसके जूठे बेर स्वीकार करना भक्ति की सर्वोच्च मिसाल है।

यह प्रसंग समाज को यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति भेदभाव से ऊपर होती है और भगवान हर भक्त के हृदय में समान रूप से निवास करते हैं।

Rajeev Aacharya article on Shabari Bhakti and Lord Ram published in Swatantra Bharat newspaper
शबरी की निष्काम भक्ति ने भगवान राम को जन-जन का आराध्य बनाया – राजीव आचार्य