श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाने वाला रक्षा बंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा बलि ने भगवान विष्णु से वचन लिया था कि वे उनके साथ पाताल लोक में रहेंगे। देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु को वैकुण्ठ वापस लाने के लिए एक साधारण ब्राह्मणी के रूप में राजा बलि के महल पहुँचीं और उन्हें राखी बांध दी। बदले में राजा बलि ने उनकी इच्छा पूछी, तो माता लक्ष्मी ने विष्णुजी को वैकुण्ठ लौटने का वरदान माँग लिया।
तब से राखी का यह पवित्र सूत्र प्रेम, विश्वास और वचनबद्धता का प्रतीक बन गया।
