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महामृत्युंजय मंत्र: मृत्यु को भी पराजित करने वाला अद्भुत मंत्र | लेख – राजीव आचार्य | प्रकाशित: Swatantra Bharat

महामृत्युंजय मंत्र: मृत्यु को भी पराजित करने वाला अद्भुत मंत्रवैदिक परंपरा में महामृत्युंजय मंत्र को अमरत्व एवं जीवन-शक्ति प्रदान करने वाला सर्वश्रेष्ठ मंत्र माना गया है। यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और इसका जप मृत्यु, रोग, भय, कष्ट तथा अकाल मृत्यु से रक्षा प्रदान करता है।प्राचीन शास्त्रों एवं पुराणों के अनुसार यह मंत्र देवताओं के भी संकट मोचक रहा है। इसे “त्र्यम्बकं यजामहे” मंत्र के नाम से भी जाना जाता है और इसका उल्लेख अनेक वैदिक ग्रंथों में मिलता है।महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ है—“मृत्यु को जीतने वाला मंत्र”यह मंत्र आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक तीनों स्तरों पर अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।मंत्र:ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥मंत्र का महत्वयह मंत्र जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।असाध्य रोगों में मन को शक्ति प्रदान करता है।भय, तनाव और नकारात्मकता को दूर करता है।साधक के चित्त को स्थिर करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है।अकाल मृत्यु के भय को समाप्त करने वाला श्रेष्ठ मंत्र माना जाता है।इस मंत्र का जप कैसे करें?सुबह या शाम शांत वातावरण में बैठकरकम से कम 108 बार जपशिवलिंग पर जल या बेलपत्र अर्पित करते हुएमन को एकाग्र रखते हुए मंत्र का उच्चारणनियमित जप से मन, शरीर और आत्मा में अद्भुत परिवर्तन आते हैं।यह लेख मूल रूप से Swatantra Bharat में प्रकाशित हुआ था।