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Jagran News: मेरी अयोध्या मेरा रघुवंश” में भगवान राम के नजरिए से पढ़े रामायण के प्रसंग

ताड़का वध के समय आपस के संवाद अहिल्या उद्धार का वर्णन शबरी का प्रेम प्रभु श्रीराम का जानकी जी के वियोग का वर्णन आदि इस पुस्तक को अन्य सभी उपन्यासों से भिन्न कर देता है। उस समय के संवाद को कथानक के माध्यम से जिस प्रकार प्रस्तुत किया गया है वह पाठकों को उपन्यास से जोड़ता चलता है और परिदृश्यों को कल्पना में बदलने में समय नहीं लगता।

By Jagran News Tue, 19 Mar 2024 11:31 PM (IST)

 नई दिल्ली, जागरण डेस्क। राजीव आचार्य की पुस्तक “मेरी अयोध्या मेरा रघुवंश” भगवान श्री राम की मानवीय लीलाओं पर आधारित एक बेहद शानदार और अद्भुत रचना है जो श्री राम के चरित्र को प्रभु राम के ही नजरिए से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती है। इसे इस प्रकार से लिखा गया है कि इससे पाठक को रामायण के प्रति एक नया नजरिया मिलता है जो उन्हें आनंदित कर देता है। “मेरी अयोध्या मेरा रघुवंश’ एक आत्मकथा के रूप में लिखी गई राम गाथा है, जिसमें भगवान श्रीराम के रघुकुल गौरव के साथ-साथ उनकी मातृभूमि अयोध्या के प्रति श्रद्धा का भी वर्णन किया गया है। इस पुस्तक में प्रभु श्रीराम द्वारा अपनी गाथा स्वयं अपने शब्दों में सुनाई गई है।

वर्णन ऐसा कि सजीव लगते हैं सभी प्रसंग

पुस्तक में अधिकांश वर्णन कथनों के रूप में हैं जो इसे और अधिक रोचक बनातें हैं। ताड़का वध के समय आपस के संवाद, अहिल्या उद्धार का वर्णन, शबरी का प्रेम, प्रभु श्रीराम का जानकी जी के वियोग का वर्णन आदि इस पुस्तक को अन्य सभी उपन्यासों से भिन्न कर देता है। उस समय के संवाद को कथानक के माध्यम से जिस प्रकार प्रस्तुत किया गया है वह पाठकों को उपन्यास से जोड़ता चलता है और परिदृश्यों को कल्पना में बदलने में समय नहीं लगता। इसके साथ ही आसपास के वातावरण जैसी छोटी-छोटी सी कल्पनाओं को शब्दों का रूप देकर उन्हें उजागर करना एक विशेष पहलू है। सभी आत्मकथाएं अपने आप में सम्पूर्ण कृति होती है और भावों से परिपूर्ण होती है। कुछ प्रसंग जैसे आहिल्या उद्धार, ताड़का वध, सीता स्वयंवर, पंचवटी में जानकी जी को न पाकर प्रभु श्रीराम का व्याकुल होना जैसे अनेकों प्रसंग इस तरह से शब्दों में व्यक्त किए गए हैं कि वे सजीव प्रतीत होने के साथ-साथ पाठक को रोमांचित भी करते हैं। “मेरी अयोध्या मेरा रघुवंश” प्रभु श्री राम पर आधारित आत्मकथा है जो पाठकों को शुरू से अंत तक जोड़ती है और पाठकों को उस काल के अनुभव को महसूस कराती है। यह एक ऐसी पुस्तक है जो आपको भगवान राम के जीवन के प्रति एक अलग नजरिया प्रदान करेगी, इसलिए यह पुस्तक सभी को जरूर पढ़नी चाहिए। अगर आप अपने कीमती समय में कुछ अच्छा पढ़ने की इच्छा रखते हैं तो अमेजॉन से इस पुस्तक को ऑर्डर कर सकते हैं।राजीव आचार्य की पुस्तक “मेरी अयोध्या मेरा रघुवंश” का विमोचन उ.प्र. की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा किया गया था। राजीव आचार्य उ.प्र. सरकार में वरिष्ठ अधिकारी भी हैं। “मेरी अयोध्या मेरा रघुवंश” को उ.प्र. के मुख्य सचिव के द्वारा डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है।