BY JAGRAN NEWS MON, 15 JUL 2024 10:15 PM (IST), रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के मानव स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष प्रभावों में अत्यधिक गर्मी समुद्र के बढ़ते स्तर बारिश में परिवर्तन जो बाढ़ और सूखे का कारण बनते हैं आदि हैं। तेज तूफानों के कारण होने वाली चोटें बीमारियां और मौतें भी शामिल हैं। अप्रत्यक्ष रूप से जलवायु परिवर्तन पर्यावरण को बदलकर स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
नई दिल्ली। इंडियन वाटर वर्क्स एसोसिएशन मुंबई के सदस्य और साहित्यकार राजीव आचार्य के अनुसार जलवायु परिवर्तन पृथ्वी पर मानव स्वास्थ्य के लिए एक बड़े खतरे के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। जलवायु परिवर्तन के अनेको कारणो में से एक महत्वपूर्ण कारण वनों का तेजी से कटान है। आधुनिकीकरण की अंधाधुंध दौड़ में पेड़ो का कटान पूरे विश्व के लिए चिंतनीय विषय है। एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 1990 से 2000 के बीच पूरे विश्व में 384000 हेक्टेयर जंगल गायब हो गए और 2015 से 2020 के बीच यह आंकड़ा आश्चर्य जनक रूप से 668000 हेक्टेयर हो गया। इससे वायुमंडल में ऑक्सीजन की कमी हो रही है और कार्बन डाइऑक्साइड में वृद्धि हो रही है, जो कि मानव स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है। जलवायु परिवर्तन वर्तमान में एक वैश्विक समस्या है ।
मानव स्वास्थ्य पर खतरा
राजीव आचार्य कहते हैं कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इनवायरमेंटल हेल्थ साइंसेस की ‘जलवायु परिवर्तन से मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव’ विषय पर जारी की गई रिपोर्ट में भी इस विषय पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के मानव स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष प्रभावों में अत्यधिक गर्मी, समुद्र के बढ़ते स्तर, बारिश में परिवर्तन जो बाढ़ और सूखे का कारण बनते हैं, आदि हैं। तेज तूफानों के कारण होने वाली चोटें, बीमारियां और मौतें भी शामिल हैं। अप्रत्यक्ष रूप से, जलवायु परिवर्तन पर्यावरण को बदलकर स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, बिगड़ता वायु प्रदूषण सांस और हृदय संबंधी स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है। तापमान और वर्षा में परिवर्तन कीड़े और अन्य प्रजातियों के अस्तित्व और व्यवहार को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे संक्रामक रोगों में बदलाव हो रहा है ।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्यवाही
जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम से निपटने के लिए यूके एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज एक नई द्विपक्षीय नीति परियोजना पर यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिसिन के साथ साझेदारी कर रही है। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध करने के लिए दोनों एकेडमी के 18 शोधकर्ताओं को चुना गया है। इस पैनल ने मार्च 2024 से काम करना भी शुरू कर दिया है और यह मार्च 2025 तक अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिसिन और यूके एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के ये रिसर्चर जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य अनुसंधान क्षेत्र द्वारा किए जाने वाले नीतिगत कार्यों को प्रस्तावित करने के लिए सहयोग करेंगे। यह टीम भविष्य में जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य के विशेषज्ञों को जोड़ेगी, जिसमें पर्यावरण की दृष्टि से मजबूत स्वास्थ्य संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करने वाले विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।
हम क्या कर सकते हैं
राजीव आचार्य ने कहा कि अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की 5 वी रिपोर्ट ग्लोबल वार्मिग और जलवायु परिवर्तन के लिए एक चेतावनी है जो यह कह रही है कि यदि हमने समय पर कार्यवाही नही की तो पृथ्वी का तापमान 2100 तक 2.7 डिग्री सेल्सियस बढ़ जायेगा । इस बचने का केवल एक ही तरीका है कि हम अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें ।
उन्होंने कहा कि पीपल , नीम , बरगद, अशोक जैसे पेड़ अधिक ऑक्सीजन को उत्पन्न करते है जिन्हे अधिक से अधिक मात्रा में लगाने से अधिक ऑक्सीजन की पूर्ति होगी जो कि वर्तमान में जरूरी है । इसके अलावा घरों में आरिका पाम , तुलसी , एलोवेरा , स्नेक प्लांट , जामुन , अर्जुन के पेड़ लगाए जो भी अधिक ऑक्सीजन को उत्पन्न करते हैं ।जिन घरों में जमीन उपलब्ध नही है उन्हे गमलों का प्रयोग करना चाहिए । राजीव आचार्य कहते हैं कि मत्स्य पुराण के अनुसार एक वृक्ष 10 पुत्रों के बराबर होता है । वृक्ष ही हमारी पृथ्वी , पर्यावरण को सुरक्षित रख सकता है ।
एक पेड़ मां के नाम*
भारत सरकार ने जलवायु एक पेड़ मां के नाम*परिवर्तन से निपटने के लिए वृहद वृक्षारोपण प्रारंभ किया है । प्रधानमंत्री माननीय मोदीजी ने ” एक पेड़ मां के नाम ” वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत करते हुए अधिक से अधिक संख्या में पेड़ लगाए जाने की अपील की है।हर भारतीय को इस अभियान से जुड़ने की आवश्यकता है। यदि जीवन को बचाना है तो पेड़ लगाना है , ये सोच विकसित करने की जरूरत है। तभी हम जलवायु परिवर्तन की विभीषिका से निपट सकते हैं। https://www.jagran.com/delhi/new-delhi-city-ncr-climate-change-is-a-big-threat-plant-trees-save-life-23759149.html