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Danik Jagran: जलवायु परिवर्तन : मानव स्वास्थ्य पर खतरा..Rajeev Aacharya

लैसेंट पत्रिका में प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन मानव स्वास्थ्य पर दिन प्रतिदिन प्रभाव डाल रहा है। जलवायु परिवर्तन मानव स्वास्थ्य के प्रत्येक पहलू को प्रभावित कर रहा है। यदि हम इसकी समीक्षा करें तो हम समझ सकते है कि यह खतरा कितना गम्भीर है। “नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन” की एक रिपोर्ट के अनुसार आज गर्भस्थ शिशु भी प्रदूषण के प्रभाव से मुक्त नहीं है।

JAGRAN NEWS /Fri, 05 Apr 2024 10:36 PM (IST)

 नई दिल्ली, जागरण डेस्क। वर्तमान में मानवता के समक्ष सबसे महत्वपूर्ण चुनौती जलवायु परिवर्तन है। जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक समस्या है, जिसे हल करने के लिए वैश्विक सहयोग के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग में चेतना की आवश्यकता है। अन्तर्राष्ट्रीय संधिया यद्यपि ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करती है। परन्तु आवश्यकता है कि जलवायु परिवर्तन के विषय में एक सोच विकसित हो और हम समग्र रूप से इस चुनौती से निपटने के लिए कार्य कर सकें।

मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव :-

हाल ही में जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य पर एक अध्ययन किया गया। जिसकी रिपोर्ट “द लैसेंट काउंट डाउन ऑन हैल्थ एंड क्लायमेंट चेंज” के माध्यम से प्रकाशित की गई है। इस रिपोर्ट में दिये गये तथ्य अत्यन्त चौंकाने वाले है। जो इस बात की ओर संकेत करते है कि जलवायु परिवर्तन से मानव स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

रिपोर्ट की मुख्य बातें :-

  •  2022 में दुनिया भर में लोग औसतन 83 दिनों तक जानलेवा गर्मी का सामना करते रहे। वर्ष 2011-2020 के मुकाबले 6 दिन ज्यादा है।
  • 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में गर्मी से होने वाली मृत्यु दर 1991-2000 के मुकाबले 85 प्रतिशत ज्यादा बढ़ गई है।
  • वर्ष 2020 में वायु प्रदुषण के कारण 6.9 मिलियन मौतें हुई जो 1990 से 44 प्रतिशत अधिक है।
  • असुरक्षित पानी और अस्वच्छता के कारण 3.1 मिलियन मौतें हुई। 

लैसेंट पत्रिका में प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन मानव स्वास्थ्य पर दिन प्रतिदिन प्रभाव डाल रहा है। जलवायु परिवर्तन मानव स्वास्थ्य के प्रत्येक पहलू को प्रभावित कर रहा है। यदि हम इसकी समीक्षा करें तो हम समझ सकते है कि यह खतरा कितना गम्भीर है। “नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन” की एक रिपोर्ट के अनुसार आज गर्भस्थ शिशु भी प्रदूषण के प्रभाव से मुक्त नहीं है। जलवायु परिवर्तन का मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव निम्न प्रकार समझा जा सकता है –

  • असमय बारिश और बेतहाशा गर्मी के कारण मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया आदि का खतरा बढ़ रहा है।
  • स्वच्छ पीने के पानी में लगातार कमी हो रही है। जिसकी वजह से डायरिया, हैजा जैसी बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ रहा है।
  • मानव शरीर में लगभग 75 प्रतिशत पानी है। पानी की कमी होने से विभिन्‍न प्रकार के रोग उत्पन्न होंगे। हाल में ही दक्षिण अफ्रिका का शहर कैप्टाउन इसका स्पष्ट उदाहरण है। भारत में यदा कदा पानी की कमी उजागर होने लगी है। वर्तमान में आईटी हब बैंगलोर पानी की कमी से जूझ रहा है।
  • जलवायु परिवर्तन की वजह से हवा में लगातार जहर घुल रहा है। इस जहरीली हवा को सांस के रूप में लेने से श्वसन तन्त्र में तकलीफ, दिल की बीमारी, फेफडों में गम्भीर बीमारियां हो सकती है। भारत में वायु प्रदूषण एक बडा स्वास्थ्य खतरा है, विशेष कर दिल्‍ली और मुम्बई जैसे बड़े शहरों में। एक आकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में जहरीली हवा के कारण भारत में 1.67 मिलियन मौते हुई। देश की राजधानी दिल्‍ली में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए वाहनों में ऑड-ईवन का फार्मूला लागू करना पड़ा।
  •  जलवायु परिवर्तन के कारण असमय बारिश हो रही है और सूखा पड रहा है। जिसके कारण खेतों की फसले खराब हो रही है। भारत जैसे देश में जहॉ 75 प्रतिशत हिस्सा  कृषि आधारित है। इस परिवर्तन से पूर्ण रूप से प्रभावित हो रहा है। फसलों के खराब होने से कुपोषण की समस्‍या के साथ-साथ अनाज में महंगाई दर एक अन्य महत्वपूर्ण कारक बन सकता है।
  •  वर्ष 2020 में भारत में 17.5 मिलियन लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। जिसके कारण विस्थापन की समस्या उत्पन्न होती है और स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।

रिपोर्ट के अनुसार जरूरी कदम :-

1. ग्रीनहाउस गैस उर्त्सतजन को कम करना जलवायु परिवर्तन से निपटने का सबसे महत्वपूर्ण कदम है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सैल्सियस तक सीमित करने के लिए 2030 तक वैश्विक उत्सर्जन को 45 प्रतिशत तथा 2050 तक शून्य करने की आवश्यकता है।

2. स्वच्छ उर्जा स्रोतों जैसे सौर उर्जा, पवन उर्जा का उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

3. जंगलों की कटाई को रोकने और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

आशा की किरण :-

हालाकि जलवायु परिवर्तन एक गम्भीर खतरा है, फिर भी उम्मीद की किरणें मौजूद है। दुनिया भर में लोग जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए समाधान ढूंढ रहे है।. नवीनीकरण उर्जा स्रोत के दामों में तेजी से कमी हो रही है। सरकार द्वारा इस विषय में जागरूकता उत्पन्न करते हुए सब्सिडी दी जा रही है। ऊर्जा दक्षता में तेजी से सुधार हो रहा है। स्थानीय खाद आन्दोलन में वृद्धि हो रही है जो परिवहन पर निर्भरता को कम करने और

खादय प्रणालियों को लचीला बनाने में मदद कर सकता है। वृक्षारोपण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। शहरी क्षेत्रों में वृक्षों की कटान में तेजी से कमी आ रही है।

हम क्‍या कर सकते है :-

जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक समस्या है। जिससे निपटने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वृह्द सम्मेलन किये जा रहे है तथा उनमें होने वाले समझौते और जलवायु परिवर्तन को रोकने में सभी देश एक मत है। वर्ष 2023 में दुबई में हुए कॉप-28 सम्मेलन में 200 से अधिक देशों “नेट जीरो लक्ष्य” पर अपनी सहमति दी। परन्तु आवश्यकता है कि समाज के भीतर जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में एक सोच विकसित हो, जिसके लिए जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन पर जागरूकता उत्पन्न करने में मीडिया की भूमिका अत्यन्न महत्वपूर्ण है। मीडिया के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग में इस विभिषिका के प्रति एक सोच उत्पन्न होगी और प्रत्येक मनुष्य इसे अपनी जिम्मेदारी समझकर कार्य करेगा। जंगलों का कटान जलवायु परिवर्तन के लिए जले में नमक छिडकने का कार्य करता है। “डेटा एग्रीमेटर आवर वर्ड डेटा इन” के नाम से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार 1990 से 2000 के बीच में 668400 हैक्टेयर जंगल गायब हो गये, जोकि अत्यन्त चिन्तनीय है। ऐसे में जरूरत है कि आम आदमी जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में विचार करें और उसकी रोकथाम के लिए अपने स्तर पर कार्य करें | हम जलवायु परिवर्तन पर जागरूकता उत्पन्न कर सकते हैं।

(राजीव ‘आचार्य’)