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छठ पूजा – आस्था, अनुशासन और सूर्य उपासना का महापर्व

छठ पूजा – आस्था का महापर्व
भारत में आस्था, पारंपरिक मान्यताओं और ऐतिहासिक विशेषताओं के कारण कई पर्व समाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्हीं में से एक है छठ पूजा — जो सूर्य उपासना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का अद्भुत संगम है।

मुख्यतः बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाने वाला यह पर्व आज पूरे भारत और विश्वभर के प्रवासी भारतीयों के बीच व्यापक रूप से मनाया जा रहा है। छठ पूजा चार दिवसीय पर्व है — नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और प्रातः अर्घ्य। इन चार दिनों में व्रती शुद्धता, संयम और तप का पालन करते हुए सूर्यदेव और छठ मैया की आराधना करते हैं।

यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यावरणीय और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सूर्य की उपासना से जीवन में ऊर्जा, प्रकाश और संतुलन का संचार होता है। सामूहिक रूप से गंगा, तालाब या नदी के किनारे पूजा का आयोजन हमारे सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भी प्रकट करता है।

लेखक: राजीव आचार्य, ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री
(लेख “स्वतंत्र भारत” समाचार पत्र में प्रकाशित)

छठ पूजा के अवसर पर श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हुए
सूर्य उपासना का पावन पर्व — श्रद्धालु छठ मैया को अर्घ्य अर्पित करते हुए