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Danik Jagran: जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा जल संकट, ग्लोबल वॉर्मिंग सबसे बड़ा कारण, जल संरक्षण के उपाय अहम : राजीव आचार्य

नई दिल्ली, जागरण डेस्क। वर्तमान में हम जलवायु परिवर्तन के वैश्विक संकट से गुजर रहे है ।वायुमंडल में मौजूद CO2 की मात्रा न्यूनतम स्तर की तुलना में दोगुनी हो चुकी है । जिसकी वजह से पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। पृथ्वी का तापमान बीते 100 वर्षों में 1 डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ गया है। पृथ्वी के तापमान में यह परिवर्तन संख्या की दृष्टि से काफी कम हो सकता है, परंतु इस प्रकार के किसी भी परिवर्तन का मानव जाति पर बड़ा असर हो रहा है।

इसके असर से भारत भी अछूता नहीं है। एक हालिया अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि तापमान तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ा तो हिमालय के 90 प्रतिशत क्षेत्र को साल भर सूखे का सामना करना पड़ सकता है। जबकि ग्लोबल वार्मिंग की सीमा 1.5 डिग्री तक सीमित रखने से भारत में कृषि क्षेत्र में सूखे के खतरे को 21 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

जलवायु परिवर्तन के साथ वैश्विक जल संकट अटूट रूप से जुड़ा हुआ है। जलवायु परिवर्तन के कारण जल-चक्र की प्रक्रिया में परिवर्तनशीलता देखी जा रही है। दुनिया के छह सबसे अधिक पानी की कमी वाले देशों में जल संकट मुख्यतः कम आपूर्ति के कारण ही है। तेजी से जनसंख्या वृद्धि के कारण यह और बढ़ गया है।

आईटी हब में पानी के लिए मचा हाहाकार

जल संकट की स्थिति कितनी भयावह हो सकती है इसका सबसे बेहतर उदाहरण दक्षिण अफ्रीका की राजधानी केपटाउन है। यह दुनिया का पहला जल-विहीन शहर घोषित हो चुका है। केपटाउन में पानी की राशनिंग की जा रही है। केपटाउन के नक्शे कदम पर हमारे देश का आईटी हब बेंगलुरु भी चल पड़ा है। देश का आईटी हब जीरो डे के कगार पर खड़ा हो गया है और अगर इसका कारण जानने का प्रयास करेंगे तो जवाब है कि कर्नाटक में पिछले मानसून में सामान्य से 18 फ़ीसदी कम बरसात हुई। मानसून के बाद भी राज्य में अच्छी बरसात देखने को नहीं मिली। कम होती बारिश और भूजल के स्तर का लगातार गिरना बेंगलुरु की हालत के लिए जिम्मेदार है। बेंगलुरु को लगभग 145 लीटर करोड़ पानी कावेरी नदी से मिलता है, 60 करोड़ लीटर पानी बोरवेल से आता है। अब ये दोनों ही स्त्रोत सूख रहे हैं और आईटी हब में हाहाकार मच चुका है। कहा जा रहा है कि गार्डन सिटी के नाम से मशहूर कर्नाटक का ये शहर आश्चर्यजनक रूप से गर्म होता जा रहा है, तापमान असामान्य रूप से बढ़ रहा है।

जल संसाधनों के लिए रक्षा जरूरी

मनुष्य के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए जल संसाधनों की रक्षा करना बहुत ही आवश्यक है। प्राकृतिक संस्थानों का संरक्षण ऐतिहासिक रूप से भारतीय जीवन शैली का महत्त्वपूर्ण हिस्सा रहा है ।भारतीय वैदिक संस्कृति प्रारंभ से ही जल की महत्ता का गुणगान करती रही है । वेदो की ऋचाये जल को सृष्टि का कारक कहती है और जल को हर दशा में बचाने का संदेश देती हैं ।परंतु पिछले के कुछ दशकों में देश में औद्योगिकीकरण, जनसंख्या के बढ़ते दबाव और शहरों के अनियोजित विकास से बड़ी मात्रा में जल संसाधनों का क्षरण हुआ है। वर्ष 1950 में देश में पानी प्रति व्यक्ति लगभग 5100 किलोलीटर प्रति वर्ष उपलब्ध था जो आज घटकर 1450 किलोलीटर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष रह गया है । हम वर्ष 2011 से जल की कमी वाले देश में गिनती करा चुके है ।ऐसे में भविष्य में शहरों में जल की मांग काफी बढ़ सकती है, अतः वर्तमान चुनौतियों से सीख लेते हुए हमें जल के सदुपयोग और संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। साथ ही सरकार की योजनाओं के अतिरिक्त औद्योगिक क्षेत्र, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य हितधारकों को सामूहिक रूप से इस अभियान में अपना योगदान देना होगा, जिससे भविष्य में आने वाली जल संकट की चुनौती को कम किया जा सके।

सिंचाई के लिए करें नई तकनीक का इस्तेमाल

जल संरक्षण के लिए माइक्रो इरिगेशन का प्रयोग एक कदम हो सकता है। “पर ड्रॉप मोर क्रॉप ” टेक्नोलॉजी से लगभग 50 फ़ीसदी तक पानी की बचत की जा सकती है ।इसके अलावा ड्रोन का प्रयोग भी सटीक सिंचाई के लिए किया जाने लगा है। ड्रोन, विशेष सेंसर और नोजल से लैस होते हैं। जिससे क्षेत्र विशेष में पानी की कमी को जानकर सिंचाई की जाती है। जिससे पानी का दुरुपयोग में कमी आती है।

सिंचाई में फर्टिगेशन मैथेड का प्रयोग करे , जिससे पानी के साथ खाद का भी बचत हो । इस दिशा में लिक्विड फर्टिलाइजर का प्रयोग और बेहतर प्रयास है।

एयरकांडिशनर और वाहनों का प्रयोग कुछ वर्षों में भारतीय शहरों की आबादी में तीव्र वृद्धि से देखने को मिला है । जिसे कम किए जाने की जरूरत है ।

इसके साथ ही हमें हर घर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य करना होगा, जिससे ग्राउंड वाटर को ज्यादा से ज्यादा रिचार्ज किया जा सके। हम सभी के संयुक्त रूप से किए गए छोटे-छोटे प्रयासों से बढ़ सकारात्मक परिणाम नजर आएंगे।

इन बातों का भी रखें ध्यान

-यह जांच करें कि आपके घर में पानी का रिसाव न हो ।

-नहाने के लिए अधिक जल को व्यर्थ न करें ।

-ऐसी वाशिंग मशीन का इस्तेमाल करें जिससे अधिक जल की खपत न हो ।

-जल को कदापि नाली में न बहाएं बल्कि इसे अन्य उपयोगों जैसे पौधों अथवा बगीचे को सींचने अथवा सफाई इत्यादि में लाए ।

-सब्जियों तथा फलों को धोने में उपयोग किए गए जल को फूलों तथा सजावटी पौधों के गमलों को सींचने में करें।

-पानी के हौज को खुला न छोड़ें।

-तालाबों, नदियों अथवा समुद्र में कूड़ा विशेषकर पॉलिथिन न फेंके

हर व्यक्ति अपने घर , मुहल्ले , पार्क में पौधा जरूर लगाए।

(राजीव आचार्य)https://www.jagran.com/news/national-water-crisis-is-increasing-due-to-climate-change-global-warming-is-the-biggest-reason-water-conservation-measures-are-important-rajiv-acharya-jprime-23684127.html

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